माँ की आखिरी चिट्ठी....
रात के 12:00 बजे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी।
तभी 17 साल की राधा के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी।
दरवाजा खोलते ही उसे एक बुड्ढा डाकिया दिखाई दिया ।
डाकिए ने राधा के हाथ में एक पुराना लिफाफा देते हुए कहा, "बेटी, यह चिट्ठी तुम्हारी मां ने आज से 10 साल पहले मेरे पास रखी थी उन्होंने कहा था कि जब तुम 17 साल की हो जाओ, तभी इस देना।"
राधा हैरान रह गई क्योंकि उसकी मां को गुजरे हुए 10 साल हो चुके थे। उसने काटते हाथों से चिट्ठी खोली। उसमें लिखा था–
"मेरी प्यारी राधा, अगर तू मेरा चिट्ठी पड़ रही हो, तो इसका मतलब है कि तुम बड़ी हो गई हो शायद अब तुम्हें मुझसे बहुत सारी शिकायत होगी कि मैं तुम्हें छोड़कर क्यों चली गई ।
बेटा, एक बात हमेशा याद रखना– जब भी तुम्हें लगे कि इस दुनिया में तुम्हारा कोई नहीं है, तो अपने घर के पुराने कैमरे में रखी लकड़ी की अलमारी खोलना ।वहां तुम्हें तुम्हारे हर सवाल का जवाब मिल जायेगा "
जिद्दी पढ़ते ही राधा की आंखों में आशु आ गए।
वह दौड़कर पुराने कैमरे में पहुंची। अलमारी खोली तो उसमें एक छोटी– सी गुल्लक, कुछ तस्वीरें और एक डायरी रखी थी ।
राधा ने डायरी खोली।
पहले पन्ने पर लिखा था —
"मेरी बेटी के सपनों के नाम..."
डायरी में उसकी मां ने हर सवाल के लिए कुछ बातें लिखी थी ।
जब राधा 5 साल की थी, तब मां ने लिखा था– "आज मेरी बेटी ने पहली बार अपने पैरों पर चलना सीखा आकाश में इस जिंदगी के हर मुश्किल रास्ते पर चलते हुए देख पाती।"
जब राधा 7 साल की थी– "आज इसने स्कूल में पहला स्थान हासिल किया। उसकी खुशी देखकर मेरा सर दर्द गायब हो गया ।"
राधा पन्ना पलटी रही। हर पन्ने पर उसकी मां का प्यार बसा था।
लेकिन आखिरी पन्ने पर कुछ ऐसा लिखा था, जिसे पढ़ कर राधा की सांस थम– सी गई ।
"राधा, तुम्हें हमेशा बताया गया कि मैं बीमारी से चल गई थी। यह सच, है लेकिन पूरा सच्चाई नहीं। मुझे सबसे ज्यादा चिंता तुम्हारी थी। मैं जानती थी कि मेरे जाने के बाद तुम्हारे पापा तुम्हें अकेले नहीं छोड़ेंगे। इसीलिए मैंने उनसे एक वादा लिया था कि वह तुम्हें कभी तुम्हारी मां की कमी महसूस नहीं होने देंगे।"
राधा की आंख से आंसू बहने लगे l
उसे याद आया कि उसके पापा हर रात उसके सो जाने के बाद उसके कमरे में आते थे, उसके सिर पर हाथ फेरते थे और चुपचाप चले जाते थे ।
वह हमेशा सोचती थी कि पापा उससे ज्यादा बात क्यों नहीं करते ।
उसे रात राधा ने पहली बार अपने पापा के कमरे का दरवाजा खटखटाया ।
पापा जाग रहे थे ।
राधा ने उन्हें कसकर गले लगा लिया और रोते हुए पूछा, "पापा, आप मुझसे इतना प्यार करते हैं, फिर कभी बताते क्यों नहीं?"
पापा की आंखें भी भर आई ।
उन्होंने कहा, "बेटा, तुम्हारी मां के जाने के बाद में तुम्हारे सामने रो नहीं पाया मुझे डर था कि अगर मैं ही टूट गया, तो तुम्हें कौन संभालेगा ?"
राधा ने पापा का हाथ पकड़ कर कहां, "पापा, आपको अकेले मन जा भूत बनने की जरूरत नहीं है। अब हम दोनों एक – दूसरे का सहारा बनेंगे ।"
उसे रात पहली बार पिता और बेटी ने एक – दूसरे के सामने अपने आंसू नहीं छुपाए ।
और अलमारी में रखी हुआ पुरानी डायरी राधा के लिए दुनिया की सबसे अनमोल चीज बन गई ।
कहानी का संदेश 💓
कभी-कभी जो इंसान हमसे सबसे ज्यादा प्यार करता है, वही अपने दर्द को सबसे ज्यादा छुपाता है।
इसीलिए अपनों से प्यार जताने में देर मत करना। क्यों की जिंदगी में कुछ लोग वापस नहीं आते, लेकिन उनका प्यार हमेशा हमारे साथ रहता है ।
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Nikki Gupta
Authorदैनिक समाचार के संपादकीय विभाग के वरिष्ठ सदस्य। देश-दुनिया के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक आलेख।
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